अध्यात्म के नय - निश्चय और व्यवहार

निश्चय और व्यवहार- ये अध्यात्म के नय है। 

उनके भेद प्रभेद निम्न प्रकार है -

नय भेद-प्रभेद


जब भी यह विषय आता है तो सवाल होता है -

१. हमे इनसे क्या लेना देना?

२. क्या आत्मा को जानने के लिए नय ज़रूरी है ?

३. अध्यात्म के नय से क्या मतलब है ?

४. ये अध्यात्म क्या है ?

५. नय क्या है ?

६. क्या ये कोरी दार्शनिक बात है ? या इसका प्रत्यक्ष भी कोई सम्बन्ध है?

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